अमरता की प्रतीति करने हेतु आवश्यक यत्न

(Dhyan Kaksh Class of 1st April 2018)

सजनों जैसा कि आप सब जानते ही हैं कि दृढ़ निश्चयी होकर, अमरता की प्रतीति रखते हुए, निर्भयता से आदर्श जीवन जीने हेतु, सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ के अनुसार, हर मानव के लिए, अपने मन को वश में रखते हुए सम, संतोष-धैर्य जैसे दिव्य गुण धारण कर, सत्य-धर्म के निष्काम रास्ते पर चलते हुए परोपकार प्रवृत्ति में ढ़लने का विधान है ताकि मानव दु:ख-सुख सम कर जान, न केवल अकर्ता-भाव भाव से अपने समस्त कर्तव्यों का कुशलता से निर्वाह करते हुए आजीवन प्रसन्नचित्त बना रह सके अपितु अंत अपने जीवन के मुख्य लक्ष्य यानि मोक्ष को भी निर्बाध सिद्ध कर सके। 


इस संदर्भ में सजनों जानो इस महान मकसद की सिद्धि यानि अपना जन्म सफल बनाने का यह महत्त्वपूर्ण कार्य, भक्त शिरोमणि सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के प्रति विशेष श्रद्धा व अपार प्रेम रखते हुए, उनका संग प्राप्त करने व आत्मविश्वास के साथ उन्ही के ही विचार नीतिसंगत अपनाने पर सहजता से संभव हो सकता है। अत: इस तथ्य के दृष्टिगत हम सजनों के लिए बनता है कि हम उन्हीं द्वारा प्रदत्त भक्ति की रीति-नीति को, सुरत व शब्द के अखंड मिलन/योग का साधन मान, अफुरता से उन्हीं के अंग-संग बने रहते हुए, सदा उन्हीं के हुक्म अनुसार निष्काम भाव से सेवारत रहे और इस प्रकार युग-धर्मों से ऊपर उठ ब्रह्म भाव अपनाए व ब्रह्ममय हो जाए।