मानव स्वरूप की पहचान

मानव स्वरूप की पहचान

हम मानव हैं। मानव यानि प्रकृति की सर्वोत्तम अद्भुत कलाकृति। मानव रूप में हमारा यह जन्म सभी जन्मों में श्रेष्ठ, महत्त्वपूर्ण व दुर्लभ है तथा मोक्ष का द्वार है। ………………….

सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ में वर्णित भजनों एवं कीर्तनों को समझने का सही तरीका

सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ में वर्णित भजनों एवं कीर्तनों को समझने का सही तरीका

बस सजनों इसी सत्य को याद रखो कि मैं आत्मा हूँ और मुझ में ही परमात्मा है। उस परमात्मा के रूप में सब कुछ मेरे ही अंतर्निहित है। अत: मुझे कुछ भी, बाहर कही से नहीं खोजना या प्राप्त करना क्योंकि मैं अपने आप में भरपूर हूँ। …….

सत्-शास्त्र के अध्ययन की महत्ता

सत्-शास्त्र के अध्ययन की महत्ता

सजनों अभी तक हम जान चुके हैं कि मन को वशीभूत कर इंद्रियों का निग्रह करने से, सम, संतोष, धैर्य, सच्चाई, धर्म जैसे गुण अपनाकर एक शक्तिशाली व सर्वगुण सम्पन्न इंसान की तरह राग-द्वेष पर विजय प्राप्त कर …….

अपने जीवन वृत्तान्त को सुन्दर बनाने का आवाहन्

अपने जीवन वृत्तान्त को सुन्दर बनाने का आवाहन्

सजनों आओ आज जानते हैं कि जब सच्चेपातशाह जी ने हनुमान जी की युक्ति अपना कर व शांति शक्ति का हथियार धारण कर, जगत में रहते हुए व सब कुछ करते हुए, शारीरिक स्वभावों से ऊपर उठ व उन शहनशाह …..

अमरपद प्राप्ति हेतु सजन दयालु श्री रामचन्द्र जी के आगे प्रार्थना

अमरपद प्राप्ति हेतु सजन दयालु श्री रामचन्द्र जी के आगे प्रार्थना

सजनों गत सप्ताह सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के गुणों के संदर्भ में जो भी बातचीत हुई, उस सब पर गंभीर रूप से मनन व चिंतन करने के उपरांत क्या आपके दिल में भी वैसा ही गुणी व सुमतिवान बनने की इच्छा जाग्रत हुई है?

अमरपद प्राप्ति हेतु सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के आगे प्रार्थना

अमरपद प्राप्ति हेतु सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के आगे प्रार्थना

जैसा कि यह सत्य सर्वविदित ही है कि सजन श्री शहनशाह हनुमान जी ही सबसे श्रेष्ठ, सबसे विद्वान, सबसे गुणवान, सबसे बलवान, सबसे धनवान, सबसे बुद्धिमान व सारी दुनियां विचों ज्ञानवान हैं।

अमरपद प्राप्ति हेतु विनती

अमरपद प्राप्ति हेतु विनती

सजनों जैसा कि गत सप्ताह हमने जाना कि अमरपद की प्रतीति करने हेतु दिल से सजन श्री शहनशाह हनुमान जी का संग करना अनिवार्य है। इसी सन्दर्भ में आओ आज इस संसार रूपी भवसागर से पार उतरने हेतु, अपने दोषों को स्वीकार, सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के आगे करबद्ध होकर, ठीक उसी प्रकार समर्पित भाव से विनती करें जिस विशुद्ध भाव से सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ से उद्धृत इस भजन में सच्चेपातशाह जी ने की और उन द्वारा प्रदत्त युक्ति का अनुशीलन कर समदृष्टि हो गए:-

अमरता की प्रतीति करने हेतु आवश्यक यत्न

अमरता की प्रतीति करने हेतु आवश्यक यत्न

सजनों जैसा कि आप सब जानते ही हैं कि दृढ़ निश्चयी होकर, अमरता की प्रतीति रखते हुए, निर्भयता से आदर्श जीवन जीने हेतु, सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ के अनुसार, हर मानव के लिए, अपने मन को वश में रखते हुए सम, संतोष-धैर्य जैसे दिव्य गुण धारण कर, सत्य-धर्म के निष्काम रास्ते पर चलते हुए परोपकार प्रवृत्ति में ढ़लने का विधान है ताकि मानव दु:ख-सुख सम कर जान, न केवल अकर्ता-भाव भाव से अपने समस्त कर्तव्यों का कुशलता से निर्वाह करते हुए आजीवन प्रसन्नचित्त बना रह सके अपितु अंत अपने जीवन के मुख्य लक्ष्य यानि मोक्ष को भी निर्बाध सिद्ध कर सके। 

ईर्ष्या द्वेष मत अपनाओ

ईर्ष्या द्वेष मत अपनाओ

दिल को सदा ईर्ष्या-द्वेष और आपस की फूट से पृथक रखना चाहिए क्योंकि आध्यात्मिक और व्यवहारिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए हृदय की शुद्धता अति उत्तम साधन है।

ईमानदारी

ईमानदारी

जीवन में किसी भी पुरुषार्थ की सिद्धि के लिए ईमानदार होना अति आवश्यक है। कहा जाता है कि जिसके पास ईमान है, वही ईमानदार है। ईमान शब्द से तात्पर्य ईश्वर में विश्वास और जीवन में सदाचार अपनाने से है।

‘Satyug’ the Golden Era of Truth is fast Approaching

‘Satyug’ the Golden Era of Truth is fast Approaching

It is universally acknowledged that nature has divided the eternal time into four eras or yugas — Satyug, Tretayug, Dwaparyug and Kalyug, which is the present era. As per the laws of nature, Satyug - the Golden Era, is definite to follow Kalyug. Therefore, it becomes necessary for all of us to enlighten ourselves about the Golden Era and become competent to mould ourselves accordingly.

Join us at Humanity Fest

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