आत्मनिरीक्षण

आत्मनिरीक्षण

सजनों हम सबको याद होगा कि चालीस दिनों के गदे के यज्ञ के बाद जो मीटिंग हुई उसमें हमें चैत्र के यज्ञ तक आत्मिक ज्ञान की पढ़ाई के प्रति अपनी परिपक्वता व कमज़ोरी की जाँचना कर….

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-5

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-5

गत सप्ताहों में सजनों हमने जाना कि मनुष्य के मन में जब तक अपने जीवन के किसी भी लक्ष्य या परम पुरुषार्थ को सिद्ध करने के प्रति दिलचस्पी, सच्ची चाहना/चाव, अभीप्सा, रुचि, उमंग….

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-4

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-4

गत सप्ताहों में सजनों हमने, जीवन के परम पुरुषार्थ क्या हैं व उसे सिद्ध कैसे करना है, इस विषय में जाना। इसके द्वारा सजनों हमें ज्ञात हुआ कि जीवन के इन परम पुरुषार्थों …

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-3

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-3

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि पुरुषार्थ निष्काम कर्म की प्रेरणा देकर व्यक्तिजनित दुर्वृत्तियों का निवारण कर अंत:करण को विमल और विशुद्ध बनाता है….

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-2

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-2

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि मनुष्य की गति अधोगामी है। निरन्तर कामनाओं के चक्कर में पड़ा रहने के कारण वह सदा नीचे की ओर देखता है तथा छल-प्रपंच…

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-1

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-1

सजनों मानव जीवन बड़ा अनमोल है। एक विशिष्ट उद्देश्य के निमित्त इस जीवन का धरती पर प्रार्दुभाव हुआ है। वह उद्देश्य है-समभाव-समदृष्टि की युक्ति अनुसार…

सजन-भाव अपनाने का आवाहन -2

सजन-भाव अपनाने का आवाहन -2

सजनों हम सब जानते हैं कि आजकल चालीसे का महायज्ञ चल रहा है। इस महायज्ञ की सिद्धि हेतु सबके  हृदय में प्रसन्नता व चेहरों पर मुस्कुराहट होनी चाहिय…

सजन-भाव अपनाने का आवाहन् -1

सजन-भाव अपनाने का आवाहन् -1

सजनों आजकल जीवन लक्ष्य सिद्धि हेतु चालीसे का यज्ञ उत्सव चल रहा है। इस शुभ समय काल के दौरान आओ यथार्थ रूप से सजन बनने का संकल्प लें और इस हेतु मिलकर बोलें…

मौन-3 (वाचालता के दुष्प्रभाव)

मौन-3 (वाचालता के दुष्प्रभाव)

सजनों अभी तक हम समझ चुके हैं मौन व उसके महत्त्व के बारे में। साथ ही हम यह भी जान चुके हैं कि जन-सम्पर्क में होने के नाते हम बोलने की आवश्यकता को नकार…

मौन-1

मौन-1

जैसा कि सजनों हम सभी जानते ही हैं कि हम एक साथ दो प्रकार के जगतों में विचरते हैं। एक प्रकार का जगत वह है जो हमारे बाहर है तथा दूसरे प्रकार का जगत हमारे चित्त के भीतर है…

प्रभु मिलन का उचित मार्गदर्शन

प्रभु मिलन का उचित मार्गदर्शन

जैसा कि सजनों हम सब जानते हैं कि समय व्यतीत हो रहा है। समय के साथ-साथ यह युग अमूल्य जीवन और आयु की घडि़याँ भी व्यतीत हो रही है और हम किए कर्मों अनुसार अपनी अंतिम परिणति की ओर बढ़ रहे हैं।……

आओ बढ़े लौकिकता से अलौकिकता की ओर...2

आओ बढ़े लौकिकता से अलौकिकता की ओर...2

यह तो सर्वविदित है कि ब्रह्म सबसे बड़ी, परम तथा नित्य चेतन सत्ता है जो जगत का मूल कारण व सत्, चित्त, आनन्दस्वरूप मानी गई है। यही नित्य चेतन सत्ता परमात्मा के नाम से भी जानी जाती है…

आओ बढ़े लौकिकता से अलौकिकता की ओर....

आओ बढ़े लौकिकता से अलौकिकता की ओर....

सजनों जानो कि परमेश्वर ने इस मायावी जगत की रचना कुदरती कला द्वारा, अकर्त्ता भाव व निर्विकारता से की है। इस महान व अवर्णनीय संरचना में परमेश्वर का प्रतिबिंबित स्वरूप ही सर्वव्यापत…

सेवा-4

सेवा-4

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि जीव स्वभाव वश कर्म अभिमानी है। इस कर्म अभिमान से वासना प्रकट होती है और वासना के वशीभूत हुआ इन्सान फिर कर्म करता है…

सेवा-3

सेवा-3

गत सप्ताहों में सजनों सेवा के विषय में हमने जाना कि मनुष्य को यह शरीर निजी सुख भोगों के लिए नहीं मिला अपितु निष्काम सेवा द्वारा दूसरों को सुख पहुँचाने के निमित्त मिला है…

सेवा-2

सेवा-2

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि हक़ीकत में सेवा क्या है? सेवा कितने प्रकार की होती है? हमें किस भाव से सेवा करनी चाहिए तथा उससे क्या प्राप्ति है…

सेवा-1

सेवा-1

सजनों जैसा कि हम सब जानते हैं कि परमधाम पहुँचना हमारे जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है जिसके लिए पहले निष्कामी और फिर ब्रह्मज्ञानी बनना आवश्यक है।…….

वृत्ति/स्मृति/बुद्धि-5

वृत्ति/स्मृति/बुद्धि-5

गत सप्ताहों में सजनों हमने वृत्ति-स्मृति व बुद्धि की निर्मलता का महत्त्व जाना। आओ सजनों आज इसी बात को सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ में विदित कीर्तन "राम रटन ओथे लग रही" के माध्यम से जानते हैं….