आओ बुद्धिहीनता त्याग, बुद्धिमान बनने का संकल्प लें

आओ बुद्धिहीनता त्याग, बुद्धिमान बनने का संकल्प लें

सजनों अब तक हम जान चुके हैं सर्वोच्च व्यक्तित्व के मुख्य आधार, श्रेष्ठ, विद्वान, गुणवान, बलवान व धनवान बनने के विषय में। आओ इसी श्रृंखला में आज जानें कि वास्तविक…

आओ निर्धनता से उबर धनवान बनें

आओ निर्धनता से उबर धनवान बनें

इस तथ्य को समझना अति अनिवार्य है। जानो इस कथन द्वारा प्रणव मंत्र यानि मूलमन्त्र आद् अक्षर, गुरु रूप में आत्मा की अमरता का भान करा रहा है और साथ…

आओ निर्बलता छोड़ बलवान बनने का संकल्प लें

आओ निर्बलता छोड़ बलवान बनने का संकल्प लें

सजनों यह बात सर्वविदित है कि महाबीर जी के बल व तेज-प्रताप से मौत भी थर-थर काँपती है। इसीलिए तो वह अमर नाम कहाते हैं और कुल सृष्टि में उन प्रभु चरणों में……

आओ अवगुण त्याग गुणवान बनने का निश्चय लें

आओ अवगुण त्याग गुणवान बनने का निश्चय लें

सजनों अभी तक हमने श्रेष्ठ व विद्वान बनने के विषय में जाना। इसी श्रृंखला में आओ आज जानें कि हमारे वास्तविक गुण क्या हैं? वे कहां से आते हैं? कैसे प्राप्त होते हैं और उन्हें धारकर…

आओ मूर्खता छोड़  विद्वान बनने का संकल्प लें।

आओ मूर्खता छोड़  विद्वान बनने का संकल्प लें।

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि श्रेष्ठता क्या है और कौन सर्वश्रेष्ठ होता है। इसी श्रृंखला में सजनों अब जानो कि श्रेष्ठता को प्राप्त रहने के लिए विद्वान बनना क्यों आवश्यक है?…

आओ श्रेष्ठ मानव बनें

आओ श्रेष्ठ मानव बनें

सजनों हम सब जानते हैं कि सतवस्तु का कुदरती ग्रन्थ हमें सजन श्री शहनशाह हनुमान जी की चरण-शरण में आ, उन द्वारा प्रदत्त युवावस्था की भक्ति यानि समभाव-समदृष्टि….

कुसंगति छोड़ सत्संगति अपनाने का आवाहन्

कुसंगति छोड़ सत्संगति अपनाने का आवाहन्

सजनों हम सब परमपद पाने हेतु आध्यात्मिक उन्नति करना चाहते हैं पर क्या कभी विचारा है कि आध्यात्मिक उन्नति सर्वाधिक किस पर निर्भर करती है?….

आओ अविचार छोड़ विचार को अपनाएं

आओ अविचार छोड़ विचार को अपनाएं

सजनों समय रहते ही अपना जीवन प्रयोजन सिद्ध कर परमपद पाने हेतु सतवस्तु का कुदरती ग्रन्थ हमें बार बार आवाहन दे रहा है कि अविचार यानि कलुकाल के….

आओ बढ़े स्वार्थपरता छोड़ नि:स्वार्थता की ओर....

आओ बढ़े स्वार्थपरता छोड़ नि:स्वार्थता की ओर....

सजनों ध्यान कक्ष में हो रही विभिन्न कक्षाओं के माध्यम से हर संभव प्रयास द्वारा प्रत्येक सजन को अपने आप की पहचान कर, आत्मबोध करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है….

हम बढ़ रहे हैं दुर्जनता से सजनता की ओर...........

हम बढ़ रहे हैं दुर्जनता से सजनता की ओर...........

सजनों यह प्रश्न तो आदिम काल से उठता रहा है, कि मानव बनने का क्या प्रयोजन है? मनुष्य सच्चे अर्थों में मनुष्य बना रहे, यही उसकी प्रयोजनीयता और सार्थकता है….

आओ दृढ़ संकल्प होकर बढ़े अपने जीवन लक्ष्य की ओर..........

आओ दृढ़ संकल्प होकर बढ़े अपने जीवन लक्ष्य की ओर..........

सजनों जैसे कि पहले भी कहा जा चुका है कि आत्मा में परमात्मा कैसे निहित है इस सत्य को पहले जानो फिर इसे मानते हुए, "विचार ईश्वर है अपना आप" इस भाव पर सुदृढ़ता से खड़े….

आओ युक्तिसंगत बढ़ें विजय-पथ की ओर.......

आओ युक्तिसंगत बढ़ें विजय-पथ की ओर.......

सजनों आज की कक्षा आरम्भ करने से पूर्व हम आप सबको स्पष्ट करना चाहते हैं कि अब से सबको अनुशासनबद्ध होना पड़ेगा। इस अनुशासनबद्धता का सर्वप्रथम नियम है….

परमार्थ दृष्टि-2

परमार्थ दृष्टि-2

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि परमार्थ दृष्टि वह चिन्तन-धारा है जिसमें हम व्यक्त और गोचर जगत के हित-चिन्तन से भी आगे अव्यक्त और अगोचर शक्ति/सत्ता में आस्था…

परमार्थ दृष्टि-1

परमार्थ दृष्टि-1

सजनों भौतिक दृष्टि जिसके द्वारा आप इस परिवर्तनशील जगत को देखते हो उसके विषय में तो आप सब जानते ही हैं परन्तु आज हम निष्कंटक परमार्थ के रास्ते पर सहजता से चलते हुए…

परमपद प्राप्त करने हेतु हुकम की महानता व महत्ता-4 (वचनबद्धता)

परमपद प्राप्त करने हेतु हुकम की महानता व महत्ता-4 (वचनबद्धता)

गत सप्ताहों में सजनों हमने जाना कि हुकम अनुसार ही जीव में जीवन का संचार होता है तथा उसी के हुकम से ही समस्त प्राणी क्रियाशील होते हैं। इसी के साथ हमने यह भी…

हुक्म की महानता व महत्ता-3

हुक्म की महानता व महत्ता-3

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि हुकम का व्यावहारिक रूप क्या है। आओ आज सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ से उद्धृत कीर्तन "हुकम बड़ा बलवान" के माध्यम से जानें कि हुकम के…

हुक्म की महानता व महत्ता-2

हुक्म की महानता व महत्ता-2

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि दृश्य-अदृश्य जगत में प्रत्येक पदार्थ का आवागमन हुकम के अंतर्गत है यानि विश्व के सभी रूप-आकार उसी परमेश्वर के हुकम द्वारा सर्जित हैं…

वितृष्णा

वितृष्णा

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि आशा-तृष्णा किसी लौकिक अथवा सांसारिक विषय-वासनाओं के रूप में इन्द्रिय सुख-भोग के बारे में होने वाली तीव्र अभिलाषा है…

आशा-तृष्णा

आशा-तृष्णा

सजनों इस संसार में जितने प्राणी हैं, वे सब सुख पाना चाहते हैं। सुख मिल जाए इसलिए अधिक से अधिक  सुख की सामग्री इकट्ठी करते हैं। इस संदर्भ में जितना ही उन्हें…