प्रकाश-6

प्रकाश-6

सजनों विस्तारपूर्वक प्रकाश की महिमा समझने के पश्चात् अब जो सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ में वर्णित वीरवार के बोर्डों के माध्यम से श्री साजन परमेश्वर कामयाब होने की युक्ति हमें बता रहे हैं अर्थात् आत्मप्रकाश द्वारा मन में छाया अज्ञान का अंधेरा हटा व अपनी वृत्ति, स्मृति, बुद्धि व स्वभावों ……..

प्रकाश-5

प्रकाश-5

आओ सजनों आज समझते हैं कि हमने परमधाम पहुँच और अपने प्रकाश को पा किस तरह परमेश्वर नाम कहाना है। इस संदर्भ में इस महान प्राप्ति के लिए जो युक्ति सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ में विदित है आओ उसको अब हर पहलू से समझते हैं।……..

प्रकाश-4

प्रकाश-4

सजनों कैसी विडम्बना है कि सजन श्री शहनशाह हनुमान जी द्वारा बताए हुए नीति-नियमों से परिचित होते हुए भी, हम सब स्वभाववश या परिस्थितियों के वशीभूत हो उन पर स्थिरता/परिपक्वता से बने रहने में अपने आप को असमर्थ पाते हैं। …….

प्रकाश-3

प्रकाश-3

सजनों हम सब सजन परमानन्द प्राप्त कर परमधाम में विश्राम पाएं उसके लिए श्री साजन परमे·ार हम कलुकालवासियो पर अपनी विशेष कृपा दृष्टि रखते हुए अपने यथार्थ से व जीव, जगत व ब्राहृ के खेल से परिचित कराने हेतु क्या कहते हैं, ……

प्रकाश-2

प्रकाश-2

सजनों ईश्वर क्या है? ईश्वर केवल प्रकाश ही प्रकाश है और कुछ भी नहीं। उसी प्रकाश को अंत: व बाह्र दृष्टि द्वारा ग्रहण कर व उसी में अपने ख़्याल व ध्यान को स्थिर कर हम अंन्दरूनी व बैहरूनी जगत को देख-समझ कर उसमें कुशलता से विचरते हुए परोपकार कमा सकते हैं।……..

प्रकाश-1

प्रकाश-1

सजनों सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ में श्री साजन परमेश्वर कह रहे हैं:- परमधाम है घर हमारा, असां परमधाम में रैहंदे हां। परमधाम है चानणा, ज्यों सूरज चढ़े हज़ार। एहो ही हम बतलाते हैं, एहो ही हम कहते हैं, एहो ही हम कहते हैं।।……….

आत्मविजय-5

आत्मविजय-5

गत सप्ताह के संदर्भ में सजनों आओ आज सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ से उद्धृत इस भजन के माध्यम से जानते हैं कि किस प्रकार सच्चेपातशाह जी ने अपने चंचल, बली व हठी मन को उपशम कर, उस पर पूर्ण विजय प्राप्त करने का अदम्य साहस दिखाया। …

आत्मविजय

आत्मविजय

कहते हैं सजनों मन ही बंधन का कारण है और मन ही मुक्ति का कारण है यानि यह मन नियन्त्रित रहने पर आपको अच्छा भी बना सकता है और अनियन्त्रित होने पर बुरा भी बना सकता है। यह बुद्धि को सचेत रहने में सहयोग भी दे सकता है और मनमानी का स्वभाव अपना अचेत भी बना सकता है। ……..

आत्मविजय-3

आत्मविजय-3

गत सप्ताहों में सजनों हमने जाना कि पूर्ण आत्मविजय ही सबसे बड़ी विजय है जो इंसान को तभी प्राप्त होती है जब वह प्रत्येक कार्य अपने निजी अहं व कर्ता भाव को त्याग कर, ईश्वार के निमित्त, उसके हुक्मानुसार करता है………..

आत्मविजय-2

आत्मविजय-2

सजनों मनुष्य में जीने की इच्छा बड़ी प्रबल है। इसी इच्छा की प्रबलता के कारण उसमें जयेषणा जागती है यानि वह दूसरों पर विजय पाना चाहता है। उन्हें अपना वशवर्ती बनाना चाहता है। दूसरों पर जयेषणा की सिद्धि के दो पथ हैं - भौतिक और आत्मिक। ……………

आत्मविजय-1

आत्मविजय-1

सजनों जैसा कि हम सभी जानते हैं कि इस संसार में सत् और असत् दोनों विद्यमान हैं। यहाँ सत् से तात्पर्य सर्वोच्च आत्मा, ब्राहृ से है जो धारण कत्र्ता को नित्य भाव में स्थिर रख व ह्मदय को पवित्र रख, उसे आत्मज्ञानी व सजन पुरुष बना, धीरता से श्रेष्ठ पद प्राप्त करने के योग्य बनाता है। ….

मानव स्वरूप की पहचान

मानव स्वरूप की पहचान

हम मानव हैं। मानव यानि प्रकृति की सर्वोत्तम अद्भुत कलाकृति। मानव रूप में हमारा यह जन्म सभी जन्मों में श्रेष्ठ, महत्त्वपूर्ण व दुर्लभ है तथा मोक्ष का द्वार है। ………………….

सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ में वर्णित भजनों एवं कीर्तनों को समझने का सही तरीका

सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ में वर्णित भजनों एवं कीर्तनों को समझने का सही तरीका

बस सजनों इसी सत्य को याद रखो कि मैं आत्मा हूँ और मुझ में ही परमात्मा है। उस परमात्मा के रूप में सब कुछ मेरे ही अंतर्निहित है। अत: मुझे कुछ भी, बाहर कही से नहीं खोजना या प्राप्त करना क्योंकि मैं अपने आप में भरपूर हूँ। …….

सत्-शास्त्र के अध्ययन की महत्ता

सत्-शास्त्र के अध्ययन की महत्ता

सजनों अभी तक हम जान चुके हैं कि मन को वशीभूत कर इंद्रियों का निग्रह करने से, सम, संतोष, धैर्य, सच्चाई, धर्म जैसे गुण अपनाकर एक शक्तिशाली व सर्वगुण सम्पन्न इंसान की तरह राग-द्वेष पर विजय प्राप्त कर …….

अपने जीवन वृत्तान्त को सुन्दर बनाने का आवाहन्

अपने जीवन वृत्तान्त को सुन्दर बनाने का आवाहन्

सजनों आओ आज जानते हैं कि जब सच्चेपातशाह जी ने हनुमान जी की युक्ति अपना कर व शांति शक्ति का हथियार धारण कर, जगत में रहते हुए व सब कुछ करते हुए, शारीरिक स्वभावों से ऊपर उठ व उन शहनशाह …..

अमरपद प्राप्ति हेतु सजन दयालु श्री रामचन्द्र जी के आगे प्रार्थना

अमरपद प्राप्ति हेतु सजन दयालु श्री रामचन्द्र जी के आगे प्रार्थना

सजनों गत सप्ताह सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के गुणों के संदर्भ में जो भी बातचीत हुई, उस सब पर गंभीर रूप से मनन व चिंतन करने के उपरांत क्या आपके दिल में भी वैसा ही गुणी व सुमतिवान बनने की इच्छा जाग्रत हुई है?

अमरपद प्राप्ति हेतु सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के आगे प्रार्थना

अमरपद प्राप्ति हेतु सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के आगे प्रार्थना

जैसा कि यह सत्य सर्वविदित ही है कि सजन श्री शहनशाह हनुमान जी ही सबसे श्रेष्ठ, सबसे विद्वान, सबसे गुणवान, सबसे बलवान, सबसे धनवान, सबसे बुद्धिमान व सारी दुनियां विचों ज्ञानवान हैं।

अमरपद प्राप्ति हेतु विनती

अमरपद प्राप्ति हेतु विनती

सजनों जैसा कि गत सप्ताह हमने जाना कि अमरपद की प्रतीति करने हेतु दिल से सजन श्री शहनशाह हनुमान जी का संग करना अनिवार्य है। इसी सन्दर्भ में आओ आज इस संसार रूपी भवसागर से पार उतरने हेतु, अपने दोषों को स्वीकार, सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के आगे करबद्ध होकर, ठीक उसी प्रकार समर्पित भाव से विनती करें जिस विशुद्ध भाव से सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ से उद्धृत इस भजन में सच्चेपातशाह जी ने की और उन द्वारा प्रदत्त युक्ति का अनुशीलन कर समदृष्टि हो गए:-