हम बढ़ रहे हैं दुर्जनता से सजनता की ओर...........

हम बढ़ रहे हैं दुर्जनता से सजनता की ओर...........

सजनों यह प्रश्न तो आदिम काल से उठता रहा है, कि मानव बनने का क्या प्रयोजन है? मनुष्य सच्चे अर्थों में मनुष्य बना रहे, यही उसकी प्रयोजनीयता और सार्थकता है….

आओ दृढ़ संकल्प होकर बढ़े अपने जीवन लक्ष्य की ओर..........

आओ दृढ़ संकल्प होकर बढ़े अपने जीवन लक्ष्य की ओर..........

सजनों जैसे कि पहले भी कहा जा चुका है कि आत्मा में परमात्मा कैसे निहित है इस सत्य को पहले जानो फिर इसे मानते हुए, "विचार ईश्वर है अपना आप" इस भाव पर सुदृढ़ता से खड़े….

आओ युक्तिसंगत बढ़ें विजय-पथ की ओर.......

आओ युक्तिसंगत बढ़ें विजय-पथ की ओर.......

सजनों आज की कक्षा आरम्भ करने से पूर्व हम आप सबको स्पष्ट करना चाहते हैं कि अब से सबको अनुशासनबद्ध होना पड़ेगा। इस अनुशासनबद्धता का सर्वप्रथम नियम है….

परमार्थ दृष्टि-2

परमार्थ दृष्टि-2

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि परमार्थ दृष्टि वह चिन्तन-धारा है जिसमें हम व्यक्त और गोचर जगत के हित-चिन्तन से भी आगे अव्यक्त और अगोचर शक्ति/सत्ता में आस्था…

परमार्थ दृष्टि-1

परमार्थ दृष्टि-1

सजनों भौतिक दृष्टि जिसके द्वारा आप इस परिवर्तनशील जगत को देखते हो उसके विषय में तो आप सब जानते ही हैं परन्तु आज हम निष्कंटक परमार्थ के रास्ते पर सहजता से चलते हुए…

परमपद प्राप्त करने हेतु हुकम की महानता व महत्ता-4 (वचनबद्धता)

परमपद प्राप्त करने हेतु हुकम की महानता व महत्ता-4 (वचनबद्धता)

गत सप्ताहों में सजनों हमने जाना कि हुकम अनुसार ही जीव में जीवन का संचार होता है तथा उसी के हुकम से ही समस्त प्राणी क्रियाशील होते हैं। इसी के साथ हमने यह भी…

हुक्म की महानता व महत्ता-3

हुक्म की महानता व महत्ता-3

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि हुकम का व्यावहारिक रूप क्या है। आओ आज सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ से उद्धृत कीर्तन "हुकम बड़ा बलवान" के माध्यम से जानें कि हुकम के…

हुक्म की महानता व महत्ता-2

हुक्म की महानता व महत्ता-2

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि दृश्य-अदृश्य जगत में प्रत्येक पदार्थ का आवागमन हुकम के अंतर्गत है यानि विश्व के सभी रूप-आकार उसी परमेश्वर के हुकम द्वारा सर्जित हैं…

वितृष्णा

वितृष्णा

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि आशा-तृष्णा किसी लौकिक अथवा सांसारिक विषय-वासनाओं के रूप में इन्द्रिय सुख-भोग के बारे में होने वाली तीव्र अभिलाषा है…

आशा-तृष्णा

आशा-तृष्णा

सजनों इस संसार में जितने प्राणी हैं, वे सब सुख पाना चाहते हैं। सुख मिल जाए इसलिए अधिक से अधिक  सुख की सामग्री इकट्ठी करते हैं। इस संदर्भ में जितना ही उन्हें…

विवेक सम्पन्न होकर जीवन पथ पर प्रशस्त होने का प्रोत्साहन

विवेक सम्पन्न होकर जीवन पथ पर प्रशस्त होने का प्रोत्साहन

सजनों अभी तक हमने इस समभाव-समदृष्टि के स्कूल में जो भी जाना उससे स्पष्टत: ज्ञात होता है कि जीवन के दो रास्ते हैं। एक अविचारयुक्त अविवेक का मार्ग है…

आत्मनिरीक्षण

आत्मनिरीक्षण

सजनों हम सबको याद होगा कि चालीस दिनों के गदे के यज्ञ के बाद जो मीटिंग हुई उसमें हमें चैत्र के यज्ञ तक आत्मिक ज्ञान की पढ़ाई के प्रति अपनी परिपक्वता व कमज़ोरी की जाँचना कर….

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-5

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-5

गत सप्ताहों में सजनों हमने जाना कि मनुष्य के मन में जब तक अपने जीवन के किसी भी लक्ष्य या परम पुरुषार्थ को सिद्ध करने के प्रति दिलचस्पी, सच्ची चाहना/चाव, अभीप्सा, रुचि, उमंग….

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-4

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-4

गत सप्ताहों में सजनों हमने, जीवन के परम पुरुषार्थ क्या हैं व उसे सिद्ध कैसे करना है, इस विषय में जाना। इसके द्वारा सजनों हमें ज्ञात हुआ कि जीवन के इन परम पुरुषार्थों …

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-3

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-3

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि पुरुषार्थ निष्काम कर्म की प्रेरणा देकर व्यक्तिजनित दुर्वृत्तियों का निवारण कर अंत:करण को विमल और विशुद्ध बनाता है….

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-2

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-2

गत सप्ताह सजनों हमने जाना कि मनुष्य की गति अधोगामी है। निरन्तर कामनाओं के चक्कर में पड़ा रहने के कारण वह सदा नीचे की ओर देखता है तथा छल-प्रपंच…

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-1

जीवन उद्देश्य के प्रति पुरुषार्थ/उद्यम की प्रेरणा-1

सजनों मानव जीवन बड़ा अनमोल है। एक विशिष्ट उद्देश्य के निमित्त इस जीवन का धरती पर प्रार्दुभाव हुआ है। वह उद्देश्य है-समभाव-समदृष्टि की युक्ति अनुसार…

सजन-भाव अपनाने का आवाहन -2

सजन-भाव अपनाने का आवाहन -2

सजनों हम सब जानते हैं कि आजकल चालीसे का महायज्ञ चल रहा है। इस महायज्ञ की सिद्धि हेतु सबके  हृदय में प्रसन्नता व चेहरों पर मुस्कुराहट होनी चाहिय…

सजन-भाव अपनाने का आवाहन् -1

सजन-भाव अपनाने का आवाहन् -1

सजनों आजकल जीवन लक्ष्य सिद्धि हेतु चालीसे का यज्ञ उत्सव चल रहा है। इस शुभ समय काल के दौरान आओ यथार्थ रूप से सजन बनने का संकल्प लें और इस हेतु मिलकर बोलें…